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मैं शव नहीं जो केवल नदी की धारा के साथ बहूं -

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युद्ध

Posted On: 30 Aug, 2014 Others,कविता,Others में

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युद्ध..

आओ युद्ध युद्ध खेलें
बहुत बरस बीत गए हैं
हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

युद्ध के लिए बहुत कारण हैं
मेरे देश में भी बेरोजगारी है
भुकमरी और लाचारी है
तुम्हारे देश में भी बेरोजगारी है
भुकमरी और लाचारी है
इससे पहले कि वो भूखे नंगे हमसे लड़ें
हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

ये बड़े बड़े उद्योगपति
मंद पड़ी गई है जिनके मुनाफे की गति
ब्रिटेन अमेरिका आस्ट्रेलिया फ्रांस इजराईल और रूस
हाथों में लेकर खड़े हैं घूस
हथियारों की इनसे खरीदी कर लें
इससे पहले कि ये हमसे लड़ लें
आओ हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

देश में हैं जितने भी
नदी पहाड़ जंगल जमीन और खान
कारपोरेट और धन्नासेठ कह रहे
कर दो हमारे नाम
ये नहीं है कोई छोटा काम
इससे पहले कि कारपोरेट और धन्नासेठ हम पर उखड़ें
आओ हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें

ब्रिटेन अमेरिका आस्ट्रेलिया फ्रांस इजराईल और रूस
बना रहे हैं भारी दबाव
हथियार बनाने के कारखाने लगाओ
उन्हें हमारे देश में पूंजी लगाना है
इसीलिये अब हमें युद्ध को राष्ट्रीय गान बनाना है
इसके पहले कि वो सब मिलकर हमारे ऊपर चढ़ें
आओ हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

किसान माँग रहे फसल के पूरे दाम
मजदूर कह रहे हटाओ वेतन जाम
बेरोजगार मांग रहे काम
गुंडों का सड़कों पर हो गया है राज
स्त्रियों की अस्मत का सड़कों पर लुटना जारी है
हवा बनी थी दबदबा नहीं बना सका मेरा नाम
अब तो कोई चारा नहीं
आओ हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

मैंने तुम्हें शपथ गृहण में बुलाया
तुम आये, मैंने शॉल दिया
तुमने साड़ी भिजवाई
हमेशा की तरह युद्ध पूर्व नाटक का
पहला मैत्रिय दृश्य समाप्त हो गया
तुम नहीं सुधरोगे जनता को विश्वास हो गया
हम तुमसे ज्यादा ताकतवर हैं
जनता को ये आभास हो गया
आओ अब आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

दो चार लोग तो हर देश में होते हैं,
यहाँ भी, वहां भी
युद्ध नहीं युद्ध नहीं जो चिल्लाते रहते हैं
इन शांतिकामियों की खबर लेने
राष्ट्र प्रेमियों की एक फ़ौज तैयार खडी है
यहाँ भी वहां भी
जो इन शान्ति प्रेमियों को खदेड़ देगी
आओ अब हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

सुनो, जनता कहाँ इसे समझेगी
रिसाला पुराना होने से पहले खत्म करना होता है
नया रिसाला खरीदोगे तभी कमीशन मिलता है
हर नया उसकी लालसा में युद्ध की ओर तकता है,
सिर्फ मेरे और तेरे देश में नहीं
हर देश में यही होता है
युद्ध कमीशन का बड़ा जरिया हैं
जनता को ये कहाँ समझता है
आओ अब हम आपस में लड़ लें
दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें,

अरुण कान्त शुक्ला, 28/8/2014

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhagwandassmendiratta के द्वारा
September 1, 2014

ये उनकी लाचारी है किसी के समझ नहीं आएगी, कुत्ते की पूंछ क्या कभी सीधी हो पायेगी| इसीलिए कहा है शान्ति के लिए युद्ध जरूरी है| मूरख के साथ मूर्खता हमारी भी मजबूरी है | कविता के भाव एवं शब्द दोनों सुन्दर हैं| धन्यवाद |

jlsingh के द्वारा
August 31, 2014

बोफोर्स केस में दलाली, एक सरकार को खा ली, नए प्रधान मंत्री को नहीं मिला कुछ समाधान! वही तो आया कारगिल जितने का काम ! युद्ध में होती है राष्ट्र भक्ति, आती है नई शक्ति, हम भखों पेट रह जायेंगे पर दुश्मन को मार भगाएंगे. अभी पैसा बैंक में आने दो, विदेशियों को बीमा करवाने दो. युद्ध का सामान जरूरी है दोनों देशों की यही तो मजबूरी है. अपने देश को बवाल को शांत करने का यही तरीका है हमने विदेशियों से ही सीखा है आओ अब हम आपस में लड़ लें दो चार नहीं तो एक युद्ध तो लड़ लें, सामायिक कविता आदरणीय शुक्ल जी!

    अरुण कान्त शुक्ला के द्वारा
    September 1, 2014

    वाह..आपने तो इसमें चार चाँद लगा दिए..धन्यवाद सिंह साहब..


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