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प्रधानमंत्री जी, आपसे ज्यादा Fertile दिमाग किसका होगा?

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ये तो बताईये, “जयापुर” में मरने वाले 5 लोगों के नाम क्या हैं?

मोदी जी ने वाराणसी के नजदीक स्थित गाँव जयापुर को गोद लेने के समारोह में भाषण देते हुए कहा कि उन्होंने जयापुर को गोद लेना इसलिए पसंद किया कि उनके वाराणसी से चुनाव लड़ने के निर्णय लेने के बाद जयापुर में आग लगने से पांच लोगों की मृत्यु हो गयी और इस तरह उन्होंने वाराणसी के किसी ग्राम का पहली बार नाम सुना तो वह जयापुर था और वह उनके दिल दिमाग पर अंकित हो गया| इसी लिए वे जयापुर को गोद ले रहे हैं| उन्होंने अपनी बात को लोगों के इस कयास से जोड़ते हुए कि जयापुर को क्यों गोद लिया जा रहा है, कयास लगाने वालों पर व्यंग्य करते हुए कहा कि लोग अपने Fertile दिमाग से जो भी कह रहे हैं, उसका उन्हें कोई पता नहीं है| सवाल यह है कि Fertile दिमाग किसका है, जो जयापुर ही क्यों गोद लिया, इसका कयास लगा रहे हैं उनका या स्वयं प्रधानमंत्री जी का| यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि प्रधानमंत्री जिस आग लगने और उसमें पांच लोगों की मृत्यु होने की घटना की बात कर रहे हैं, ऐसी कोई घटना तो जयापुर में हुई ही नहीं है| पर, इसके पहले कि ऐसी घटना हुई या नहीं या क्या हुआ था, इसकी पड़ताल की जाए, आईये पहले प्रधानमंत्री ने जयापुर में ग्राम को गोद लेते समय क्या कहा, हुबहू उनके शब्दों में ही पढ़ लिया जाए ताकि भक्तों की भौं-भौं से बचाव हो सके..

सांसद आदर्श ग्राम जयापुर वाराणसी के समारोह मे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भाषण का संबोधन के बाद का वह हिस्सा जैसा कि तैसा, जिसमें जयापुर को चुनने का उनका कारण उन्होंने बताया है..

“भारत सरकार ने एक सांसद आदर्श ग्राम योजना की कल्पना की है। अब मुझे भी एक सांसद के नाते इस आदर्श ग्राम योजना की जिम्मेवारी लेनी थी। मैं पिछले दिनों अखबार में भांति-भांति की कल्पना कथाएं पढ़ रहा था। कोई कहता है जयापुर इस कारण से लिया है, कोई कहता है जयापुर उस कारण से लिया है, किसी ने कहा जयापुर ऐसे लिया है, जयापुर में ऐसा है, जयापुर में वैसा है, पता नहीं इतनी कथाएं मैं पिछले दिनों पढ़ रहा हूं कि मैं हैरान हूं, लेकिन इतना Fertile दिमाग लोगों का रहता है .. मैंने इस गांव में क्यों आना पसंद किया, जो मैं पढ़ रहा हूं, ऐसी किसी बात का मुझे पता नहीं है। मैंने पसंद किया उसका एक बहुत छोटा सा कारण है और छोटा कारण यह है कि जब भारतीय जनता पार्टी ने मुझे बनारस से पार्लियामेंट का चुनाव लड़ने के लिए घोषित किया, उसके कुछ ही समय के बाद मुझे जानकारी मिली की जयापुर में आग लगने के कारण 5 लोगों की मृत्यु हो गई और बहुत बड़ा हादसा हुआ। बनारस लोकसभा क्षेत्र में किसी एक गांव का सबसे पहले मैंने नाम सुना तो जयापुर का सुना था। वो भी एक संकट की घड़ी में सुना था। मैंने.. मैं एमपी तो था नहीं, सरकार भी हमारी यहां नहीं थी लेकिन मैंने सरकारी अधिकारियों को फोन किए, हमारे कार्यकर्ताओं को फोन किए और सब लोग यहां मदद के लिए पहुंचे थे। तो ये एक कारण था, जिसके कारण मेरे दिल दिमाग में जयापुर ने जगह ले ली थी। जिस संबंध का प्रारंभ संकट की घड़ी से होता है, वो संबंध चिरंजीवी बन जाता है। यही एक छोटा सा कारण है कि मेरा जयापुर से जुड़ने का एक सौभाग्य बन गया। बाकि जिन्होंने जितनी कथा चलाई है, सब गलत है, सब बेकार है। मैं खुद उन कथाओं को नहीं जानता हूं।”..

आईये अब पड़ताल करें कि आग लगाने से पांच लोगों के जलकर मरने की जिस घटना का वह जिक्र कर रहे हैं, वह हुई या नहीं या वह क्या है..?

वस्तुस्थिति यह है कि जयापुर में हाईटेंशन तार गिरने से आधा दर्जन लोग झुलसे तो थे लेकिन कोई मृत्यु नहीं हुई थी। मोदी जी ने भी इस संबंध में जयापुर के ग्राम प्रधान से बात की थी| जिसकी पड़ताल इस लिंक पर हो सकती है| (http://khojinews.com/news-details.php?id=968)

इंटरनेट पर भी गूगल में सर्च करने पर आपको कहीं इस घटना में किसी मृत्यु की खबर देखने को नहीं मिलेगी। इस घटना के बाद मोदी ने स्वयं जयापुर के ग्राम प्रधान को फोन करके घटना की जानकारी ली थी| यह खबर इस लिंक पर भी देखी जा सकती है |(http://bharatvani.in/20140415294/%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8/)

हम जैसे लोगों को, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान अयोध्या में गोलीकांड के बाद भारतीय जनता पार्टी के द्वारा कथित मृतकों के फर्जी अस्थि कलशों को सारे देश में घुमाए जाने के कारनामे को, ईंटें इकठ्ठी करने के कारनामे को और अब लोहा एकत्रित करने के कारनामे को देख चुके हैं, प्रधानमंत्री को बातों को इस तरह बातों को तोड़ते-मरोड़ते और झूठों को गढ़ते हुए देखकर कोई आश्चर्य नहीं होता है । आखिर यही तो वह वाक्-कला है, जिसके बल पर लोग बहलाए और फुसलाये जा सकते हैं| हाँ, यदि यह पूछेंगे कि, यदि वास्तव में उस घटना में 5 लोगों की मृत्यु हुई थी तो क्या राज्य सरकार या केंद्र सरकार ने कोई मुआवजा दिया था, यदि दिया था तो उसकी सूची जारी की जाए और यदि नहीं दिया था तो मोदी सरकार अब तक क्या कर रही थी ? तो यह अपराध होगा और इसकी सजा सरकार तो जब देगी-तब देगी, मोदी भक्त अभी से देना शुरू कर देंगे भौं-भौं करके|

वैसे प्रधानमंत्री जी सच तो यही है कि आपसे ज्यादा Fertile दिमाग किसका होगा?
जरा ये तो बताईये, “जयापुर” में मरने वाले 5 लोगों के नाम क्या हैं?

अरुण कान्त शुक्ला, 8 नवम्बर, 2014

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
November 16, 2014

आदरणीय शुक्ला जी, अपने छोटे से लेख में आपने तथ्यों की सत्यता के प्रति संदेह व्यक्त किया है | इस सन्दर्भ में सत्यता जो भी हो स्वीकार किये जाने में किसीको एतराज नहीं होना चाहिए | प्रतीकात्मक भाषा रोजमर्रा की भाषा, प्रहसन की भाषा, व्यंग की भाषा का भाव अर्थ लिया जाना ही सदा श्रेयस्कर होता है फिर भी किसी बिंदु को पकड़ कर बैठ जाना ही, यदि किसी का अभीष्ट बन गया है तो उसके लिए क्या कहा जा सकता है | इसके लिए विकल्प उपलब्ध हैं | मोदी समर्थकों को “भोकतें है, भोकते है” कहते रहना अगर आप को अच्छा लगता है तो अगला लेख “भोकते है” शीर्षक से लिखकर अपनी कुंठा को तृप्त कर सकते हैं| बहुत स्नेह प्यार के साथ आपका |

jlsingh के द्वारा
November 9, 2014

अब मैं क्या कहूँ, एक मन्त्र तो पढ़ लिया गया है…फ़िलहाल फावड़ा चलाने की कला और जापान में ड्रम बजाने की कला में अपनी पारंगता दिखाने की प्रशंशा की जानी चाहिए… fertile दिमाग न होता तो आज इतने लोकप्रिय तो न होते! इंदिरा, नेहरू, बाजपेयी को भी पीछे छोड़ चुके हैं. अब कह रहे हैं मैं नहीं मेरा काम बोलेगा. झाड़खं, और कश्मीर के बाद दिल्ली फतह की तैयरी कर ली है उन्होंने ….. सादर!

    अरुण कान्त शुक्ला के द्वारा
    November 10, 2014

    धन्यवाद सिंह साहब..

rameshagarwal के द्वारा
November 8, 2014

                                        जय श्री राम  लगता है लोगो को मोदीजी में बुराई दुढ़ने की आदत है जरूर मुलायम या राहुल के चमचे होगे.अच्छी मानसिकता से सोचे कम से कम गाँव के उत्थान के लिए कार्य हो रहा है.


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